ज़िन्दगी का सफ़र – हिंदी शायरी

क्या सफ़र है ये ज़िन्दगी का या कोई इमितिहान है मेरा,
चली जा रही हूँ, दिये जा रही हूँ।

ना मंज़िल का पता है, ना परिणाम का,
फिर भी जिए जा रही हूँ, उम्मीद किये जा रही हूँ।

कहाँ पहुँचूंगी इस राह में, क्या पाऊँगी इस इम्तिहान से,
इसी सोच में अब मैं नादानियां किये जा रही हूँ।

क्या सफ़र हैं ये ज़िन्दगी का या कोई इम्तिहान है मेरा,
चली जा रही हूँ, दिए जा रही हूँ।

– मोनिका

10 Comments
  1. abu sufiyan Writes on 4 April, 2016

    Aap ki baat bilkul thik hai
    Insan apne andar kami dekhe doosron ke andar nahi

  2. tarkeshwar sharma Writes on 29 March, 2016

    Very nice lines

  3. Nema Ram Ghotiya Writes on 23 January, 2016

    जय #___श्री_राधेकृष्ण………
    .
    “प्रत्येक व्यक्ति #समाज को सुधारने की बात करता है,
    .
    लेकिन कोई स्वयं को #सुधारने की बात नहीं करता…!!!”
    .
    #________सुप्रभात…
    .
    ??आपका दिन शुभ हो…?#_Nema

  4. saraj budathoki Writes on 22 January, 2016

    Kay batau year
    Sakucta aapne batay bi…

  5. deepak pal Writes on 22 January, 2016

    Very nice

  6. Monu Meena Writes on 21 January, 2016

    Superb line Monika

  7. VIRENDRA KUMAR Writes on 20 January, 2016

    BEST

  8. Dev - 8604150871 Writes on 19 December, 2015

    less but good line

  9. Golu saini Writes on 15 December, 2015

    Nice line……

  10. vikram shinde Writes on 9 December, 2015

    shayari drad ki

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