Hindi Shayari

  • Mai unse mohabbat itna karta hun
    Baata nahi sakte ke kitna karta hun
    Aankon me taswur unka karta hun
    Woh college aye na aye unka dedar karta hun

    Shaik Siraz 15 February, 2017
  • हसरते वस्ल गर दिल में है तो क्या होगा,तु अगर जलवानुमा हो तो कोई बात बने..

    Santosh Pathak 9 February, 2017
  • Kai Dino se dekha nahi he tumko
    ek halchal si much gai he muje
    ab kya karu kuch samaj nahi ata
    tere Siva kuch najar nahi ata… 😊😊

    Rahul Chauhan 5 February, 2017
  • Khushbu Ki Taraah Meri Her Saans Mein,
    Pyar Apna Bsaane Kaa Waada Kro Lo,
    Rang Jitney Tumhaari Mohabbat K Hain,
    Mere Dil Mein Sazaane Ka Waada Karo Lo.

    Vivek Kuntal 31 January, 2017
  • Dard K Sailab Se Waqib Hoke Tere Ishq Ko Kubula Hai.
    Ehsaas Se Bandhi Dor Ko Mehsoos Kiya Hai.
    Tere Har Darkhan Mein Apne Aap Ko Mehsoos Kiya Hai.

    Shivani Singh 31 January, 2017
  • Tamam Mein Shareek Hone K Wabjud Main Kiski Murshid Nhi Ban Saki, Par Main Kiski Khawab Bani Hu Jo Meri Rooh Ko Samil Kr Arzoo Mein Samil Kiya Hai.

    Shivani Singh 31 January, 2017
  • Teri Dhadkan Ke Kareeb Gyi To Mehsoos Kiya Kitna Sukoon Hai Tere Pass.

    Shivani Singh 31 January, 2017
  • Din Gujrata Hai Teri Baatein Karke,
    Raat Kat_ti Hai Akhon Mein Teri Yaadein Bharke …

    Seema Vibhute 30 January, 2017
  • Sard Raat Ki Dhimi Barsaat Ne Kuch Yun Asar Kiya,
    Banzar Dil Bhi Nikal Pada Paani Ki Talash Me.

    Sparsh Rastogi 27 January, 2017
  • मुझे तो आदत है तुम्हें याद करने की,
    अगर हिचकियाँ आएँ तो माफ़ करना!

    Pooja 26 January, 2017

हर ख़ुशी मुझ से छूट गयी।
जो तुम मुझ से रूठ गयी।

अब जीता हु बस तेरे इंतज़ार में।
बस दे दो थोड़ा प्यार मुझे।

ये वादा है दूंगा हर कदम साथ तेरा।
बस थाम ले तू हाथ मेरा।

सच कर दूंगा हर ख्वाब तेरा।
चाहे हो जाऊ मैं खुद भी फ़ना।

मैं जीना तुम से सीखा हूं।
मर जाऊंगा तेरे बिना।

तू आजा फिर से पास मेरे।
फिर रख दे दिल पर हाथ मेरे।

मैं फिर से जीना चाहता हुँ।
तुझ को फिर पाना चाहता हुँ।

फिर हसन रोना चाहता हुँ।
तू चल दे बस साथ मेरे।

– ज़ुबैर इक़बाल, मुरादाबाद

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Dil Letter

बिछड गया …
बिछड गया कोई हमसे अपना

करीबी वक्त की मार में
कोई हो गया अंजान हमसे
किसमत की इस चाल में

टूट कर बिखर गये अरमान मेरे
इस कदर
फिर टूट गया मेरे इस दिल का भी सबर

बिछड गया कोई हमसे अपना
पहली दफह किसी को इतना चाह था मैनें
उसे फिर अपना खुदा माना था मैंने

वो मेरे ख्यालों में जीया करता था
मेरे हर साँस की एक वजह वो भी हुआ करता था

बिछड गया कोई हमसे अपना

उसे इज्हार कर हमने अपनी मुहब्बत का इहसास कराया था
खामौशी में उसने भी फिर प्यार जताया था

मैं उम्मीदों को जिंदा रख जीने लगा था
उसके हर दुख को अपना समझ पीने लगा था

बिछड गया कोई हमसे अपना

वो दुखी सा होकर हम्हें इंकार करता था
वजह अंजान थी क्योकि हर बार करता था

मैं उसे सच्ची मुहब्बत करने लगा
उसके हाँ के इतजार में जीने लगा

बिछड गया कोई हमसे अपना

सब कुछ अच्छा चल रहा था
उसे भी है अब प्यार एसा लग रहा था

फिर अचानक इक भवंडर आया
मेरी जीवन में तूफान ले आया

बिछड गया कोई हमसे अपना

उसके अतीत का इक पन्ना आज उसका आज बनकर आया
मेरे दिल में हलचल मची फिर उसने मुझे बहुत रूलाया

टूट गया मैं अपनी क़मुहब्बत को संजोता – संजोता इस कदर…
देख ना सका अपना बुरा भी हर डगर

बिछड गया कोई हमसे अपना

फिर उसकी खुशी के लिए फिका सा मैं भी हंस दिया
हर अरमान मैंने अपना जिंदा दफन फिर मैनें कर लिया

आज वो दूर है मुझसे ए सच है
मुझे प्यार आज भी है उस्से ए भी सच है

उस उपर वाले की मर्जी नें मुझे अलग कर दिया
वो अलग हुआ पर मुझे पत्थर दिल कर दिया

बिछड गया कोई हमसे अपना …

– Saurabh Saini

जीवन का अधार होती हैं बेटियाँ
सपनो को साकार करती हैं बेटियाँ

और हमारी खुशी के लिए
अपने सपनों से व्यापार करती हैं बेटियाँ

फिर क्यो नजर आती है वो चूल्हे पर रोटी सेकती
अरे समझो यार ईश्वर का वरदान होती हैं बेटियाँ।

– Anup Kumar
Ab. Rech student whose hobby is to write.

Dr. Kumar Vishwas Numaish Poem Lyrics in Hindi

कल नुमाइश में फिर गीत मेरे बिके
और मैं क़ीमतें ले के घर आ गया
कल सलीबों पे फिर प्रीत मेरी चढ़ी
मेरी आँखों पे स्वर्णिम धुआँ छा गया

कल तुम्हारी सु-सुधि में भरी गन्ध फिर
कल तुम्हारे लिए कुछ रचे छन्द फिर
मेरी रोती सिसकती सी आवाज़ में
लोग पाते रहे मौन आनंद फिर
कल तुम्हारे लिए आँख फिर नम हुई
कल अनजाने ही महफ़िल में, मैं छा गया

कल सजा रात आँसू का बाज़ार फिर
कल ग़ज़ल-गीत बनकर ढला प्यार फिर
कल सितारों-सी ऊँचाई पाकर भी मैं
ढूँढता ही रहा एक आधार फिर
कल मैं दुनिया को पाकर भी रोता रहा
आज खो कर स्वयं को तुम्हें पा गया

– डॉ. कुमार विश्वास